कोई इश्क़ बना तो कोई महरूमियत
कोई आरज़ू बना तो कोई ख़ाक हो गया
किसी ने हौसला रखा जीने के लिए
कोई इतना जला यहां की राख हो गया..
कोई इश्क़ बना तो कोई महरूमियत
कोई आरज़ू बना तो कोई ख़ाक हो गया
किसी ने हौसला रखा जीने के लिए
कोई इतना जला यहां की राख हो गया..
मेरी मुस्कराहटों पे यकीन कम था उसे और आंसुओ पे ज्यादा..
जब हमने रोना सीख लिया तो उसने मुस्कराना सीख लिया...
हम बेशक़ बदलते चले गए उसे समझाते समझाते..
हमने खोना सीख लिया और उसने बदलना सीख लिया..
✍🏻ज़िन्दगी-ए-सागर✍🏻