Monday, October 1, 2018

ना कोई इश्क़ था....

अच्छा लगता था खुद से मिल कर कभी..
ना कोई इश्क़ था ना कोई तकलीफ..

Sunday, June 24, 2018

कोई इश्क़ बना तो कोई...

कोई इश्क़ बना तो कोई महरूमियत
कोई आरज़ू बना तो कोई ख़ाक हो गया

किसी ने हौसला रखा जीने के लिए
कोई इतना जला यहां की राख हो गया..

Thursday, June 21, 2018

मेरी मुस्कराहटों पे..

मेरी मुस्कराहटों पे यकीन कम था उसे और आंसुओ पे ज्यादा..
जब हमने रोना सीख लिया तो उसने मुस्कराना सीख लिया...

हम बेशक़ बदलते चले गए उसे समझाते समझाते..
हमने खोना सीख लिया और उसने बदलना सीख लिया..

✍🏻ज़िन्दगी-ए-सागर✍🏻